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23 October 2015

आयुर्वेदिक औषधियां – भाग:1

आयुर्वेदिक औषधियां – भाग:1

आक :
आक का पौधा पूरे भारत में पाया जाता है। गर्मी के दिनों में यह पौधा हरा-भरा रहता है परन्तु वर्षा ॠतु में सुखने लगता है। इसकी ऊंचाई 4 से 12 फुट होती है । पत्ते 4 से 6…………….
आडू :
यह उप-अम्लीय (सब-,एसिड) और रसीला फल है, जिसमें 80 प्रतिशत नमी होती है। यह लौह तत्त्व और पोटैशियम का एक अच्छा स्रोत है।………………

आलू :
आलू सब्जियों का राजा माना जाता है क्योकि दुनियां भर में सब्जियों के रूप में जितना आलू का उपयोग होता है, उतना शायद ही किसी दूसरी सब्जी का उपयोग होता होगा। आलू में कैल्शियम, लोहा, विटामिन ‘बी’ तथा……………….

आलूबुखारा :
आलूबुखारे का पेड़ लगभग 10 हाथ ऊंचा होता है। इसके फल को आलूबुखारा कहते हैं। यह पर्शिया, ग्रीस और अरब की ओर बहुत होता है। हमारे देश में भी आलूबुखारा अब होने लगा है। आलूबुखारे का रंग ऊपर से मुनक्का के…………..

आम :
आम के फल को शास्त्रों में अमृत फल माना गया है इसे दो प्रकार से बोया (उगाया) जाता है पहला गुठली को बो कर उगाया जाता है जिसे बीजू या देशी आम कहते है। दूसरा आम का पेड़ जो कलम द्वारा उगाया जाता है। इसका पेड़ 30 से 120 फुट तक ऊचा होता है……………………

आमलकी रसायन :
आमलकी (बीज रहित फल) बारीक चूर्ण लेकर आमलकी रस में सूखने तक मर्दन करें। इस विधि को 21 बार दोहरायें। मर्दन छाया में ही करें।…………………..

आंबा हल्दी :
आंबा हल्दी के पेड़ भी हल्दी की तरह ही होते हैं। दोनों में अन्तर यह है कि आंबा हल्दी के पत्ते लम्बे तथा नुकीले होते हैं। आंबा हल्दी की गांठ बड़ी और भीतर से लाल होती है, किन्तु हल्दी की गांठ की छोटी और पीली होती है। आंबा हल्दी में सिकुड़न तथा झुर्रियां नही होती है……………..

अफीम :

अफीम पोस्त के पोधे पोपी से प्राप्त की जाती है । अफीम के पौधे की ऊंचाई एक मीटर, तना हरा, सरल और स्निग्ध (चिकना), पत्ते आयताकार, पुष्प सफेद, बैंगनी या रक्तवर्ण, सुंदर कटोरीनुमा एंव चौथाई इंच व्यास वाले…………………….

आँवला :

आंवले का पेड़ भारत के प्रायः सभी प्रांतों में पैदा होता है। तुलसी की तरह आंवले का पेड़ धार्मिक दृष्टिकोण से पवित्र माना जाता है। स्त्रियां इसकी पूजा भी करती है। आंवले के पेड़ की ऊचाई लगभग 20 से 25 फुट तक होती है।…………………

अभ्रक :

अभ्रक, कशैला, मधुर और शीतल है, आयुदाता धातुवर्द्बक और त्रिदोष(वात, पित्त और कफ) नाशक है, फोड़ा, फुंसी प्रमेह और कोढ़ को नाश करने वाला है, प्लीहा (तिल्ली), उदर रोग, ग्रन्थी और विष दोषों का मिटाने वाला है, पेट……………….

अदरक :

भोजन को स्वादिष्ठ व पाचन युक्क्त बनाने के लिए अदरक का उपयोग आमतौर पर हर घर में किया जाता है। वैसे तो यह सभी प्रदेशों में पैदा होती है,लेकिन अधिकाशं उत्पादन केरल राज्य में किया जाता है। भूमि के अन्दर……………..

अडूसा (वासा) :

सारे भारत में अडूसा के झाड़ीदार पौधे आसानी से मिल जाते हैं । ये 4 से 8 फुट ऊंचे होते हैं । अडूसा के पत्ते 3 से 8 इंच तक लंबे और डेढ़ से साढ़े तीन इंच चौड़े अमरुद के पत्तो जैसे होते हैं । नोकदार, तेज गंधयुक्त,………………………..

अकरकरा (PELLITORY ROOT) :

अकरकरा अल्जीरिया में सबसे अधिक मात्रा में पैदा होता है। भारत में कश्मीर, आसाम, आबू और बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों में और गुजरात, महाराष्ट्र आदि की उपजाऊ भूमि में कही-कही उगता है। वर्षा के शुरु में ही इसका झाड़ीदार पौधा उगना प्रारंभ हो जाता है। अकरकरा का तना रोएंदार और ग्रंथियुक्त होता है। अकरकरा की छाल कड़वी और………………

अगर :

अगर का पेड़, आसाम, मलाबार, चीन की सरहद के निकटवर्ती ‘नवका’ शहर के ‘चतिया’ टापू में, बंगाल में दक्षिण की ओर के उष्णकटिबन्ध के ऊपर के प्रदेश में और सिलहट जिले के आसपास ‘जातिया’ पर्वत पर………………….

अगस्ता :

अगस्ता का वृक्ष (पेड़) बड़ा होता है। यह बगीचो और खनी हुई जगहो में उगता है। अगस्ता की दो जातियां होती है। पहले का फूल सफेद होता है तथा दूसरे का लाल होता है। अगस्ता के पत्ते इमली के पत्तो के समान होते हैं। अगस्त……………..

आकड़ा :

आकड़ा का पौधा 4 से 5 फुट लम्बा होता है। यह जंगल में बहुत मिलता है। कैलोट्रोपिस जाइगैण्टिया नाम से यह होम्योपैथी में काम में ली जाती है…………

ऐन :
ऐन के वृक्ष(पेड़)बहुत बड़े होते हैं। ऐन के पेड़ की लकड़ी मजबूत होती है। इसकी लकड़ी का प्रयोग एमारतो और नाव एत्यादि बनाने में यह काम आती है। ऐन के पत्ते लम्बे होते हैं। ऐन के पेड़ की दो जातियां होती है- सफेद…………………

अजमोद :

अजमोद के गुण अजवायन की तरह होता है। परन्तु अजमोद का दाना अजवायन के दाने से बड़ा होता है। अजमोद भारत वर्ष में लगभग सभी जगह पाई जाती है लेकिन विशेष कर बंगाल में, यह शीत ॠतु के आरंभ में बोई जाती है। यह हिमालय के उत्तरी और पश्चिमी प्रदेशो……………

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